फूल

कभी वो टूट कर देवालय में आराध्य हो जाते हैं

तो कभी वो भूखों की दावत के लिए बिक जाते हैं।

होली

​चलो आज कुछ उन्हें भी दे आएं रंग

जिनका जीवन हो गया है बेरंग

जो इनसे हैं बहुत दूर

गरीबी के आगे हैं मजबूर

जो बैठे हैं अपनी जान की बाज़ी लगाये

उन्हें भी घर की याद दिला आएं

उनको प्यार दे आएं जिन्होंने अपनों को है खोया

गले मिल कर हमने भी है उन्हें अपना बनाया

उन कलियों को भी खिलने दें

उन्हें आसमान में उड़ने दें

उन्हें दो चार किताबें दे आएं

उन्हें दुआएं दे आएं

फिर से आशा की किरण आ जाए

सतरंगी करदें आसमां

बांध जाए फिर ये समां

मुट्ठी भर रंग से गाल रंग दे

फिर से कृष्ण राधा की हमजोली कर दे

पिचकारी से कुछ दाग धो आएं

नफरत को भी साफ़ कर आएं

गुलाल से महक जाए यह जीवन

सबका मन करदें प्रसन्न

गुंजिया से जुबां भी मीठी करदें

भांग से हल्का सा नशा छा जाएगा

सुनी गलियों में टोलियों का राज हो जाएगा।

आप सभी को रंगों के त्यौहार की हार्दिक शुभकामनाएं।

मेरी मोहब्बत

​खुदा मुझसे माँ की मोहब्बत न छीने

अगर छीनना है जहाँ छीन ले वो
जमी छीन ले आसमाँ छीन ले वो
मेरे सर की बस एक ये छत न छीने
खुदा मुझसे माँ की मोहब्बत न छीने
अगर माँ न होती जमीं पर न आता
जो आँचल न होता कहाँ सर छुपाता
मेरा लाल कहकर बुलाती है मुझको
कि खुद भूखी रहकर खिलाती है मुझको
कि होंठों कि मेरी हँसी छीन ले वो
कि गम देदे हर एक खुशी छीन ले वो
यही एक बस मुझसे दौलत न छीने
खुदा मुझसे माँ की मोहब्बत न छीने
मुझे पाला पोसा बड़ा कर दिया है
कि पैरों पे अपने खड़ा कर दिया है
कभी जब अँधेरों ने मुझको सताया
तो माँ की दुआ ने ही रस्ता दिखाया
ये दामन मेरा चाहे नम कर दे जितना
वो बस आज मुझ पर करम कर दे जितना
जो मुझ पर किया है इनायत न छीने
खुदा मुझसे माँ की मोहब्बत न छीने

अगर माँ का सर पर नहीं हाँथ होगा
तो फ़िर कौन है जो मेरे साथ होगा
कहाँ मुँह छुपाकर के रोया करूंगा
तो फ़िर किसकी गोदी में सोया करूंगा
मेरे सामने माँ की जाँ छीनकर के
मेरी खुशनुमा दासताँ छीन कर के
मेरा जोश और मेरी हिम्मत न छीने
खुदा मुझसे माँ की मोहब्बत न छीने